विश्वास का साया - Furkan S Khan की बेवफा शायरी

Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली बेवफा शायरी 'विश्वास का साया', जो प्यार में मिले धोखे और टूटे विश्वास की कहानी कहती है।

Sunday, September 20, 2026
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विश्वास का साया - Furkan S Khan की बेवफा शायरी
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20 September 2026
विश्वास का साया - Furkan S Khan की बेवफा शायरी
Bewafa Shayari — By Furkan S Khan
मेरी भक्ति का मंदिर, तेरे नाम पर बना था, हर पूजा, हर दुआ, तुझको ही सुना था। मेरे दिल का हर कोना, तेरी सूरत से सजा था, तू ही मेरा खुदा था, तू ही मेरा खुदा था। जब राहें थीं अनजानी, तू ही रास्ता था, अंधेरों में भी तेरा, ही एक उजाला था। हर दर्द में मरहम, तू ही तो दिलासा था, तुझसे ही तो मेरा, सारा जहाँ बसा था। पर कैसे कहूँ तुझको, तूने क्या किया, मेरे विश्वास की नींव को, तूने ही हिला दिया। जो अपना कहा था, वो पराया हुआ, मेरा सब कुछ लुटा, तू बेवफ़ा हुआ। अब बिखरे हुए टुकड़ों को, कौन समेटेगा, टूटे हुए इस दिल को, कौन अब जोड़ेगा? मेरा अटूट भरोसा, तूने ही तोड़ा था, तू ही मेरा सब कुछ था, तू ही बेवफ़ा था।

भक्ति: ईश्वर या किसी प्रिय व्यक्ति के प्रति गहरी श्रद्धा या प्रेम। अनजानी: अनजान, अपरिचित। मरहम: घाव भरने वाली दवा, शांति देने वाला। दिलासा: सांत्वना, तसल्ली। नींव: आधार, बुनियाद। अटूट: जिसे तोड़ा न जा सके, अविचल।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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