यादों का अनमोल ख़ज़ाना: दिल छू लेने वाली प्रेम कविता | Furkan S Khan

फ़ुरकान एस ख़ान की यह ख़ूबसूरत प्रेम कविता 'यादों का अनमोल ख़ज़ाना' उन अनमोल पलों को समर्पित है जो प्यार में हमेशा साथ रहते हैं। पढ़ें और खो जाएँ मीठी यादों में।

Sunday, September 20, 2026
AMP 0 1
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
यादों का अनमोल ख़ज़ाना: दिल छू लेने वाली प्रेम कविता | Furkan S Khan
“यादों का अनमोल ख़ज़ाना: दिल छू लेने वाली प्रेम कविता | Furkan S Khan”
Favicon
Vews
https://www.vews.in/s/M6GRJD
Date
20 September 2026
यादों का अनमोल ख़ज़ाना: दिल छू लेने वाली प्रेम कविता | Furkan S Khan
Love Poetry — By Furkan S Khan
बरसों गुज़र गए, पर वो पल आज भी ताज़ा हैं, तेरी हर एक बात, हर हँसी का अंदाज़ है। दिल की हर धड़कन में, तेरी यादों का साया है, जैसे कोई मीठा गीत, जो हर पल गुनगुनाया है। वो मुलाक़ातें पहली, वो नज़रों का मिलना, वो तेरे साथ हर लम्हा, मेरा खुद से पिघलना। आज भी लगता है जैसे, तू यहीं कहीं मौजूद है, मेरी साँसों में तेरी ख़ुशबू, मेरा हर सुकून है। ये यादें ही तो हैं, जो मुझे तुझसे जोड़े रखती हैं, अँधेरी रातों में भी, रोशनी बन चमकती हैं। तेरी बाहों का वो एहसास, वो रेशमी सा स्पर्श, हर दर्द भुला देता है, दे जाता है नव वर्ष। ये अनमोल ख़ज़ाना है, मेरे दिल की दुनिया का, जिसे कोई नहीं छीन सकता, ये हिस्सा है मेरी रूह का। तेरी यादों के सहारे ही, ये ज़िंदगी चलती है, हर साँस में बस तू है, हर पल तू ही मिलती है।
Love Poetry — By Furkan S Khan
वो बीते लम्हे, अब बस यादें बन गए हैं, ख़ामोश रातों में, अक्सर हमें मिलते हैं। तेरी हँसी की गूँज, कानों में अब भी आती है, वो नर्म हाथ की छुअन, दिल को बहुत भाती है। कभी एक ख़ुशबू सी, तू पास से गुज़रती है, कभी चाँदनी बन, मेरे आँगन में उतरती है। हर पल तेरे साथ का, अब एक ख़्वाब सा लगता है, ये दिल आज भी तेरी राह, बेसब्री से तकता है। तन्हाई की दहलीज पर, जब शाम उतरती है, तेरी यादों की किरण, मुझमें फिर से उभरती है। कैसे कहूँ कितना, तू आज भी ज़रूरी है, तेरे बिना मेरी हर कहानी, अधूरी है। ये यादों का सिलसिला, कभी रुकता नहीं है, मेरे दिल का गुलशन, कभी सूखता नहीं है। तेरी यादों से ही तो, मेरी साँसें चलती हैं, हर धड़कन में बस तू है, हर पल तू ही मिलती है।
Love Poetry — By Furkan S Khan
मेरे दिल में एक छोटा सा, यादों का आशियाना है, जहाँ हर लम्हा तेरा, मेरा सबसे पुराना है। तू नहीं पास मेरे, पर तेरी यादें साथ रहती हैं, हर सूनी रात में, वो मुझे आके कहती हैं। तेरी बातें, तेरी मुस्कान, वो तेरी प्यारी आँखें, आज भी मेरे ज़हन में, रच-बस जाती हैं, जैसे शाखें। जब दुनिया की भीड़ में, मैं खुद को तन्हा पाता हूँ, तेरी यादों की पनाह में, मैं सुकून से सो जाता हूँ। ये यादें ही तो हैं, जो मुझे हिम्मत देती हैं, हर मुश्किल घड़ी में, मुझको सहारा देती हैं। जैसे सूखे पत्तों को, नई बहार मिलती है, वैसे ही तेरी यादों से, मेरी रूह खिलती है। ये मेरा वो घर है, जहाँ तू हमेशा रहती है, मेरी हर साँस, हर धड़कन, बस तेरा नाम कहती है। तेरी यादों का ये आशियाना, कभी वीरान न होगा, ये वो रौशन चिराग़ है, जो कभी बुझेगा न होगा।

अनमोल: बहुत कीमती। ख़ज़ाना: धन का संग्रह, यहाँ यादों का संग्रह। अंदाज़: शैली, तरीका। साया: परछाई, यहाँ मौजूदगी का एहसास। गुनगुनाया: धीरे-धीरे गाया गया। पिघलना: घुल जाना, खो जाना। मौजूद: उपस्थित। सुकून: शांति, आराम। रेशमी: रेशम जैसा कोमल। स्पर्श: छूना, अहसास। नव वर्ष: नया साल, यहाँ नई ऊर्जा या आशा। रूह: आत्मा।

लम्हे: पल, क्षण। ख़ामोश: शांत। गूँज: प्रतिध्वनि। छुअन: स्पर्श। भाती है: अच्छी लगती है। आँगन: घर का खुला स्थान। ख़्वाब: सपना। बेसब्री: अधीरता। तकता है: देखता है, इंतज़ार करता है। दहलीज: देहली, द्वार। किरण: प्रकाश की रेखा। उभरती है: प्रकट होती है। ज़रूरी: आवश्यक। अधूरी: अपूर्ण। सिलसिला: क्रम, श्रंखला। गुलशन: बाग़, बगीचा।

आशियाना: घोंसला, घर, ठिकाना। लम्हा: पल, क्षण। सूनी: खाली, वीरान। ज़हन: मन, मस्तिष्क। रच-बस जाती हैं: घुल-मिल जाती हैं। शाखें: पेड़ की टहनियाँ। तन्हा: अकेला। पनाह: शरण, आश्रय। सुकून: शांति, आराम। हिम्मत: साहस। सहारा: समर्थन। बहार: वसंत, रौनक। रूह: आत्मा। वीरान: उजाड़, ख़ाली। रौशन: प्रकाशित, उज्ज्वल। चिराग़: दीपक।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

Comments (0)

User