असम की बाढ़: केवल जलवायु संकट नहीं, गहराती शासन विफलता की कहानी
असम में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ सिर्फ जलवायु परिवर्तन का परिणाम नहीं। यह दशकों की प्रशासनिक अनदेखी और कुप्रबंधन की गंभीर विफलता को उजागर करती है।
Key Highlights
- असम की वार्षिक बाढ़ें अब सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक विफलता का प्रतीक हैं।
- कमजोर बुनियादी ढाँचा, लचर नदी प्रबंधन और भ्रष्टाचार ने स्थिति को भयावह बना दिया है।
- विशेषज्ञ दशकों से दीर्घकालिक, वैज्ञानिक समाधानों की मांग कर रहे हैं, पर ठोस प्रगति धीमी है।
असम की बाढ़: सिर्फ प्रकृति का प्रकोप नहीं, गहरी प्रशासनिक खामियां
असम में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ कोई नई बात नहीं। लेकिन इस बार, विशेषज्ञ इसे केवल जलवायु परिवर्तन का परिणाम मानने से इनकार कर रहे हैं। उनका स्पष्ट मत है: यह दशकों के कुशासन, अपर्याप्त योजना और लचर कार्यान्वयन का सीधा नतीजा है। एक प्राकृतिक घटना को मानवीय त्रासदी में बदलने के पीछे यही कारण हैं। राज्य में लगातार आती ये बाढ़ें अब एक मौसमी रस्म बन चुकी हैं, जो हर बार जीवन, संपत्ति और उम्मीदों को बहा ले जाती हैं।
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