बीवी का खज़ाना: मजेदार हिंदी फनी शायरी

पेश है बीवी के खज़ाने पर एक मजेदार और हास्य से भरपूर हिंदी शायरी। पति-पत्नी के रिश्तों पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में कही गई यह शायरी आपको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देगी।

Monday, September 21, 2026
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बीवी का खज़ाना: मजेदार हिंदी फनी शायरी
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21 September 2026
बीवी का खज़ाना: मजेदार हिंदी फनी शायरी
Funny Shayari — By Furkan S Khan
मेरी बीवी का खज़ाना, कुछ अनोखा ही लगता है, कभी डांट का पिटारा, कभी प्यार लुटाता है। जब भी कोई फरमाइश, पूरी न हो पाती है, तो उसका चेहरा गुस्से से, लाल हो जाता है। कहती है, 'ये घर मेरा, मैं ही इसे सजाती हूँ', और फिर सारा काम, मुझ पर ही लाद जाती है। कभी ताने मारेगी, कभी प्यार से मनाएगी, ये रिश्ता भी अजब है, जो हर रोज़ नया रंग दिखाता है। सारे पैसे उड़ा देती है, फिर भी कुछ नहीं बताती है, और जब मैं पूछूँ, तो कहती है, 'सब बचाती हूँ'। ये बीवी का खज़ाना, एक पहेली है भाई, समझने की कोशिश में, जो भी आता है, वो गँवाता है।
Funny Shayari — By Furkan S Khan
मैं तो बस बिस्तर में, आराम से लेटा रहता है, दुनियादारी की फिक्र, मुझको कहाँ होता है। काम की बात करो तो, बहाना कोई ढूँढता है, 'आज मूड नहीं', कहकर, फिर सो जाता है। माँ कहती है, 'बिगड़ गया है, कुछ काम नहीं करता', और मैं सोचता हूँ, 'ये दुनिया क्यों नहीं बदल जाता'। दोस्त कहते हैं, 'यार, तू कब तक यूँ ही रहता है?' मैं कहता हूँ, 'जब तक, कोई मुझे उठा न देता है'। मेहनत से तो मेरा, छत्तीस का आँकड़ा है, जो भी मिलता है, बस यूँ ही मिल जाता है। पर क्या करूँ, ये आदत मेरी, कब जाएगी, ये आलसी इंसान, बस सोता ही रहता है।

फरमाइश - इच्छा, काम - कार्य, अजब - अनोखा, पहेली - रहस्य, गँवाता - खो देता है

दुनियादारी - सांसारिक मामले, बहाना - कारण, छत्तीस का आँकड़ा - दुश्मनी

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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