टूटे दिल के ज़ख़्मों की सिलाई: भावनात्मक उपचार की हिंदी कविता

एक दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता जो भावनात्मक उपचार और टूटे दिल को फिर से जोड़ने की उम्मीद के बारे में है। Furkan S Khan द्वारा लिखी गई।

Sunday, September 20, 2026
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टूटे दिल के ज़ख़्मों की सिलाई: भावनात्मक उपचार की हिंदी कविता
“टूटे दिल के ज़ख़्मों की सिलाई: भावनात्मक उपचार की हिंदी कविता”
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20 September 2026
टूटे दिल के ज़ख़्मों की सिलाई: भावनात्मक उपचार की हिंदी कविता
Heartbreak Poetry — By Furkan S Khan
टूटे दिल के अश्कों से, धोए हैं ज़ख़्मों के निशाँ। जो कभी थे राज़ गहरे, अब वो लगते हैं बेगाना। बीते लम्हों की आग में, खुद को हमने जलाया, जो बचा है राख का ढेर, वही हमारा है फ़साना। हर सिसकी में एक आह छुपी, हर आह में दर्द पुराना, फिर भी उम्मीद की लौ जलाए, ज़िंदगी को है जीना। ये बिखरे टुकड़े समेट कर, एक नया सवेरा लाना, ज़ख़्मों की सिलाई ऐसे, जैसे हर दर्द हो भुलाना। कल की परछाईं से निकल, भविष्य की राह तकना, टूटे विश्वास की नींव पर, एक नया घर बनाना।

अश्क - आँसू, निशाँ - निशान, राज़ - रहस्य, बेगाना - पराया, फ़साना - कहानी, सिसकी - रोने की आवाज़, लौ - ज्योत, समेट कर - इकट्ठा करके, सिलाई - जोड़ना, परछाईं - छाया, नींव - आधार

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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