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उदासी की आहें: फ़ुरकान एस खान की दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल
फ़ुरकान एस खान द्वारा लिखी गई यह ग़ज़ल उदासी, दर्द और बिखरे सपनों की कहानी कहती है। हर पंक्ति में एक गहरी भावना छिपी है।
Tuesday, September 1, 2026
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“उदासी की आहें: फ़ुरकान एस खान की दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल”
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Date
01 September 2026
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Ghazal — By Furkan S Khan
हर साँस एक आह सी, जो दिल में दबी हुई
हर लम्हा एक दर्द है, जो सहना पड़ा हुआ
ये कैसा समां है, कि सूना है ये जहाँ
मेरा हर ख़्वाब बिखरा, जो संजोया हुआ
वो बातें, वो वादे, सब झूठे निकले
हर उम्मीद को तोड़, जो दिल ने बुना हुआ
आँखों में नमी है, होंठों पे खामोशी
एक अजनबी सा ग़म, मुझको घेरे हुआ
कब तक यूँ रोता रहेगा, ये दिल बेचारा
हर पल बस एक याद है, जो बीता हुआ
कहता है 'फुरकान' अब, क्या होगा कल का
ये ग़म का साया, कब तक छाया हुआ
Kaafiya: जहाँ, यहाँ, वहाँ
Radeef: है
समां: माहौल, दृश्य ज़माना: दुनिया, संसार संजोया: सहेजा, संभाला अजनबी: अपरिचित, अनजान बेचारा: असहाय
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