इश्क़ की रौशनी: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली नज़्म

फ़ुरक़ान एस ख़ान की ख़ूबसूरत नज़्म 'इश्क़ की रौशनी' में प्रेम के गहरे एहसास और जीवन में उसके महत्व को महसूस करें। दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ।

Tuesday, September 1, 2026
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इश्क़ की रौशनी: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली नज़्म
“इश्क़ की रौशनी: फ़ुरक़ान एस ख़ान की दिल छू लेने वाली नज़्म”
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https://www.vews.in/hum-aur-zindagi/ishq-ki-roshni-furkan-s-khans-heart-touching-nazm
Date
01 September 2026
Nazm — By Furkan S Khan
जब से तू आया, जीवन में रौशनी है, हर साँस में तेरी, अब बस बंदगी है। तेरा साथ है तो, हर मंज़िल आसान है, ये दिल भी मेरा, अब तेरा मेहमान है। तेरे बिन हर पल, इक सूनी कहानी है, तेरे संग हर सुबह, इक नई रवानी है। तेरी यादों से ही, मेरी दुनिया सजी है, ये इश्क़ ही तो मेरी, असली ज़िंदगी है।
Nazm — By Furkan S Khan
ये कैसी मोहब्बत है, जो लबों पे आती नहीं, बस आँखों से ही सारी बात कह जाती है। तेरा एहसास है हर पल, मेरी साँसों में बसा, ये दिल की ज़ुबाँ है, जो कभी छुप पाती नहीं। न कोई गिला है, न कोई शिकायत है, बस तेरे ही नाम की, ये दिल में इबादत है। तू पास रहे या दूर, फ़र्क़ नहीं पड़ता है, ये इश्क़ तो रूह का, इक पाक रिश्ता है।

रौशनी: प्रकाश, उजाला। बंदगी: इबादत, भक्ति। मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य। मेहमान: अतिथि। सूनी: खाली, वीरान। रवानी: प्रवाह, गति। सजी: सुसज्जित, सँवरी हुई।

लबों: होठों पर। एहसास: अनुभव, अनुभूति। ज़ुबाँ: ज़बान, भाषा। गिला: शिकायत, शिकवा। इबादत: पूजा, भक्ति। पाक: पवित्र, शुद्ध। रिश्ता: संबंध, नाता।

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Zainab
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